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हरसिंहपुर में स्थित शक्तिपीठ मां श्री शीतला धाम में चल रही राम कथा के दौरान पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सुनाइ।

आज़मगढ़ /उत्तर प्रदेश/संवाददाता -शुभम कुमार रावत

आजमगढ़।
सगड़ी सुख और दुख दोनों भाई हैं, एक अगर अभी उपस्थित है तो दूसरा भी यहां आने ही वाला है। जैसे जाड़ा और गर्मी का मौसम है। एक जाता है तो दूसरा आने की तैयारी करता है।

यह बातें हरसिंहपुर में स्थित शक्तिपीठ मां श्री शीतला धाम में चल रही राम कथा के दौरान पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सुनाइ। जीवन में सब समय एक रस रहना बहुत कठिन है। इससे संबंधित महाभारत में भगवान कृष्ण जी के द्वारा कहा गया एक श्लोक भी है -सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयों।सुख और दुःख को समान समझकर, लाभ-हानि और विजय-पराजय को एक समान मानकर व्यवहार करने वाला व्यक्ति कोई महाज्ञानी हो सकता है। भगवान भोलेनाथ अपने स्वाभाविक स्वरूप में ऐसे ही रहा करते हैं। जीव तो एक रस रही नहीं सकता है वह सुख में सुखी हो जाता है और दुख में दुखी हो जाता है।यह जीव धर्म है। कर्तव्य पथ पर चलते हुए सम स्थिति में जीना बहुत ही कठिन है। सीताराम विवाह से आगे के प्रसंग की कथा सुनाते हुए पूज्य श्री ने कहा कि मनुष्य अपने कर्म बिगाड़ करके ही जीवन में दुख कष्ट और बीमारी प्राप्त करता है।

मनुष्य को खासकर अपने विवाह के बाद अपने कर्मों के प्रति सावधान जरूर हो जाना चाहिए। सीखने के लिए एक अवस्था होती है जीवन भर बार-बार गलती कर करके नहीं सीखा जा सकता है।हमारे हाथ में केवल हमारा कर्म है। हमारे कर्म से ही हमारा प्रारब्ध बनता है। कोई भी व्यक्ति किसी और के भाग्य को बदल नहीं सकता है। क्योंकि उसका भाग्य तो उसके अपने ही कर्मों से बना होता है। कर्म का फल हर हाल में खाना होता है और सनातन धर्म विश्वास पर ही टिका है।

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