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मुजफ्फरपुर में सस्पेंड दारोगा पर दबंगई का आरोप, वकील का घर खाली कराने पहुंचे तो हुआ हंगामा

मुजफ्फरपुर: शहर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के सोडा गोदाम चौक इलाके में बुधवार रात उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब एक निलंबित दारोगा कथित तौर पर एक अधिवक्ता के पैतृक मकान को खाली कराने पहुंच गए। घटना के बाद इलाके में काफी देर तक हंगामा होता रहा और लोगों की भीड़ जमा हो गई।

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता विजय प्रसाद और राजू कुमार के घर पर पहुंचे दारोगा की मौजूदगी का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि विरोध बढ़ने पर उन्होंने अपनी पिस्टल निकाल ली और कार्रवाई की चेतावनी दी। हालांकि, भीड़ का आक्रोश देखते हुए वह मौके से चले गए। सूचना मिलने पर पुलिस की गश्ती टीम भी स्थल पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया।

न्यायालय में चल रहा मामला

पीड़ित राजू कुमार का कहना है कि मकान से जुड़ा विवाद पहले से न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद रात करीब साढ़े आठ बजे निलंबित एसआई सुजीत कुमार निजी वाहन से पहुंचे और जबरन घर में प्रवेश कर दबाव बनाने लगे। उन्होंने मारपीट और गाली-गलौज का भी आरोप लगाया है। राजू के मुताबिक, पूर्व में बिना किसी आधिकारिक आदेश के उनके घर में सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया था, जिसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की गई थी।

बताया जा रहा है कि संबंधित दारोगा फिलहाल ब्रह्मपुरा थाने से निलंबित हैं। इसके बावजूद उन पर पुलिस पद का रौब दिखाकर मकान खाली कराने का प्रयास करने का आरोप है।

वहीं, ब्रह्मपुरा थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की सूचना मिली है और पीड़ित पक्ष से लिखित आवेदन मांगा गया है। आवेदन मिलने के बाद जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि दारोगा किराये के मकान के संबंध में वहां पहुंचे थे।

फिलहाल, पूरे प्रकरण की जांच जारी है और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

घटना की शिकायत मिली है। इसका वीडियो भी मिला है। इसमें दोनों के बीच बातचीत हो रही है। पिस्टल निकालने की बात सामने नहीं आई है। सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। जांच के बाद पूरा मामला स्पष्ट होगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

– मो. मोहिबुल्लाह अंसारी, सिटी एसपी

बिहार के 42 विधायकों को हाईकोर्ट का नोटिस, चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी का आरोप

बिहार की राजनीति में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पटना हाईकोर्ट ने पक्ष और विपक्ष के कुल 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इन नोटिस पाने वालों में बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार का नाम भी शामिल है।

अदालत ने चुनावी हलफनामों में कथित रूप से गलत जानकारी देने और अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विधायकों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने निर्धारित समयसीमा के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


हारने वाले उम्मीदवारों की याचिका से खुला मामला

जानकारी के मुताबिक, संबंधित विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विजयी उम्मीदवारों ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथपत्रों में तथ्य छिपाए या गलत जानकारी दी।

कुछ याचिकाओं में मतदान प्रक्रिया के दौरान अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर दिया। अब आगे की कार्रवाई विधायकों द्वारा दाखिल जवाब और दस्तावेजों के आधार पर होगी।


किन नेताओं को भेजा गया नोटिस

नोटिस पाने वालों में ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव का नाम भी शामिल है। इसके अलावा पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और विधायक चेतन आनंद को भी जवाब देने के लिए कहा गया है।

गोह विधानसभा क्षेत्र से अमरेंद्र प्रसाद का नाम भी सूची में शामिल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नोटिस पाने वालों में सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों के विधायक शामिल हैं, जिससे स्पष्ट है कि मामला दलगत राजनीति से अलग कानूनी दायरे में जांचा जा रहा है।


राजनीतिक और कानूनी असर

हाईकोर्ट की इस कार्रवाई को चुनावी पारदर्शिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित विधायकों की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

विधायकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया है। ऐसे में आगामी सुनवाई और अदालत के रुख पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा के भीतर और बाहर बयानबाजी भी तेज हो सकती है।