Breaking News
अमिताभ बच्चन-शाह रुख खान संग काम करने में दिलचस्पी नहीं: Kohrra क्रिएटर सुदीप शर्मा का बड़ा बयान
amitabhshahrukh-1771489774397

हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार शाह रुख खान के साथ काम करना जहां ज्यादातर फिल्ममेकर्स का सपना होता है, वहीं मशहूर ओटीटी क्रिएटर सुदीप शर्मा की सोच इससे अलग है।

पाताल लोक’ और ‘कोहरा’ जैसी चर्चित वेब सीरीज बना चुके सुदीप शर्मा ने हालिया इंटरव्यू में साफ कहा कि उन्हें इन बड़े सितारों के साथ काम करने की कोई खास इच्छा नहीं है।

सुदीप शर्मा का साफ जवाब

सीरीज ‘कोहरा’ के दूसरे सीजन के प्रमोशन के दौरान दिए गए इंटरव्यू में सुदीप ने कहा कि उनका मकसद स्टार्स के साथ फिल्म बनाना नहीं, बल्कि मजबूत कहानियां कहना है। उनके अनुसार, उन्होंने काम इसलिए शुरू नहीं किया कि वे किसी बड़े सुपरस्टार के साथ जुड़ सकें, बल्कि इसलिए किया क्योंकि वे वैसी कहानियां बनाना चाहते थे जिन्हें वे खुद पसंद करते हैं।

उन्होंने यह भी माना कि अगर कभी ऐसा मौका मिला तो वे घबराहट महसूस करेंगे, क्योंकि इतने बड़े सितारों के साथ काम करना अपने-आप में बड़ी जिम्मेदारी होती है।

स्टारडम बनाम कहानी

सुदीप का मानना है कि किसी बड़े स्टार के साथ काम करते समय कहानी और किरदार अक्सर उसके स्टारडम के हिसाब से ढाले जाते हैं। ऐसे में फिल्म से ज्यादा चर्चा स्टार के इर्द-गिर्द होने लगती है, जो उन्हें आकर्षित नहीं करता। वे फिलहाल कंटेंट-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग पर ही फोकस रखना चाहते हैं।

Kohrra Season 2 की सफलता

‘कोहरा’ का दूसरा सीजन ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix पर रिलीज के बाद शानदार प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भारत में नंबर-1 पर ट्रेंड कर रहा है और ग्लोबल टॉप-10 लिस्ट में भी अपनी जगह बना चुका है।

इससे पहले ‘पाताल लोक’ की सफलता ने भी सुदीप शर्मा को डिजिटल स्पेस के मजबूत क्रिएटर्स की कतार में ला खड़ा किया था।

CAपति ने पत्नी की कैसे की हत्या? सीन रीक्रिएट करेगी पुलिस, कैंची-ग्लव्स बरामद

झज्जर | हरियाणा के हिसार से जुड़े बहुचर्चित हत्याकांड में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। बैंकर पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के आरोपी सीए अंशुल धवन को पुलिस टीम हिसार लेकर पहुंची, जहां उससे तीन दिन के रिमांड के दौरान गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां वारदात से जुड़े हर सबूत को जोड़ने में जुटी हैं।

कैंची और ग्लव्स बरामद

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई कैंची और दस्ताने (ग्लव्स) बरामद किए हैं। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि ये सामान पहले से खरीदा गया था या वारदात से ठीक पहले किसी दुकान से लिया गया। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि अपराध पूर्व नियोजित था या अचानक हुआ।

चरित्र पर शक बना हत्या की वजह

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पत्नी महक पर शक के चलते यह खौफनाक कदम उठाया। रविवार रात आरोपी ने कैंची से गर्दन पर वार कर पत्नी की हत्या कर दी। महक गुरुग्राम के एक बैंक में कार्यरत थी और दंपती वहीं नौकरी करते थे।

शादी के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, महक की शादी 25 सितंबर 2025 को अंशुल से हुई थी। शादी के बाद दोनों गुरुग्राम में रह रहे थे। समय के साथ आपसी विवाद बढ़ते गए, जो अंततः इस जघन्य अपराध में बदल गए।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस टीम हिसार से झज्जर रूट तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपी की आवाजाही, वाहन मूवमेंट और बयान का मिलान किया जा सके। तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।

सीन रीक्रिएशन की तैयारी

मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस आरोपी को घटनास्थल पर ले जाकर “सीन रीक्रिएशन” कराने की तैयारी कर रही है। इससे हत्या के दौरान की गतिविधियों, समयक्रम और आरोपी के बयान की सत्यता परखने में मदद मिलेगी।

आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

मृतका के भाई अक्षय की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। हरियाणा पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक और फॉरेंसिक आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आरोपी को हिसार स्थित उसके घर और अन्य संभावित ठिकानों पर भी ले जाया गया, जहां से अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि कोई भी कड़ी अधूरी न रहे, इसके लिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।

डैमेज कंट्रोल में जुटे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, आवास पर 101 बटुकों का सम्मान कर दिया बड़ा राजनीतिक संदेश

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों ब्राह्मण राजनीति को लेकर हलचल तेज है। इसी कड़ी में राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों का सम्मान कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। इसे विपक्षी दलों—खासतौर पर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी—द्वारा ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिशों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

प्रतीकात्मक राजनीति को मिला बल

प्रदेश में इन दिनों प्रतीकात्मक आयोजनों के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की राजनीति तेज हो गई है। हाल ही में प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े शिष्यों की शिखा खींचे जाने के विवाद ने तूल पकड़ा था। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रजेश पाठक ने संबंधित पुलिसकर्मियों को ‘पापी’ तक कह दिया था।

इसी पृष्ठभूमि में उनके आवास पर आयोजित बटुक पूजन और सम्मान समारोह को राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।

आवास पर हुआ सम्मान समारोह

लखनऊ के राजभवन कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बटुक पहुंचे। उपमुख्यमंत्री ने पत्नी के साथ मिलकर उनका पूजन किया, तिलक लगाया और पुष्पवर्षा कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का माहौल उत्सव जैसा रहा और इसे ब्राह्मण समाज के सम्मान से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

‘शिखा खींचने वालों को लगेगा पाप’

17 फरवरी को लखनऊ में एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान ब्रजेश पाठक ने कहा था कि बाल ब्राह्मणों की शिखा खींचने वालों को “महापाप” लगेगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी थी—खासतौर पर इसलिए क्योंकि वे स्वयं सरकार में उपमुख्यमंत्री पद पर हैं।

सीएम के बयान से बढ़ा सियासी तापमान

इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी चर्चा में रहा। बजट सत्र के दौरान उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि “कोई स्वयं को शंकराचार्य कैसे कह सकता है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं—मैं भी नहीं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिली।

विपक्ष भी सक्रिय

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। वहीं बसपा प्रमुख मायावती भी लगातार ब्राह्मण समाज के पक्ष में बयान देती रही हैं।

ब्राह्मण विधायकों की बैठकों और जातीय समीकरणों को लेकर चल रही सियासी खींचतान ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है।

डैमेज कंट्रोल या राजनीतिक विस्तार?

राजनीतिक पंडित ब्रजेश पाठक के इस आयोजन को दो नजरियों से देख रहे हैं—

  • एक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से उपजे असंतोष को शांत करने की कोशिश
  • दूसरा, स्वयं को प्रदेश की ब्राह्मण राजनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित करने की रणनीति

फिलहाल, इस कार्यक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में संदेश साफ गया है कि ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर सियासी सक्रियता आने वाले समय में और तेज रहने वाली है।

बिहार के 42 विधायकों को हाईकोर्ट का नोटिस, चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी का आरोप

बिहार की राजनीति में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पटना हाईकोर्ट ने पक्ष और विपक्ष के कुल 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इन नोटिस पाने वालों में बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार का नाम भी शामिल है।

अदालत ने चुनावी हलफनामों में कथित रूप से गलत जानकारी देने और अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विधायकों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने निर्धारित समयसीमा के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


हारने वाले उम्मीदवारों की याचिका से खुला मामला

जानकारी के मुताबिक, संबंधित विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विजयी उम्मीदवारों ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथपत्रों में तथ्य छिपाए या गलत जानकारी दी।

कुछ याचिकाओं में मतदान प्रक्रिया के दौरान अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर दिया। अब आगे की कार्रवाई विधायकों द्वारा दाखिल जवाब और दस्तावेजों के आधार पर होगी।


किन नेताओं को भेजा गया नोटिस

नोटिस पाने वालों में ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव का नाम भी शामिल है। इसके अलावा पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और विधायक चेतन आनंद को भी जवाब देने के लिए कहा गया है।

गोह विधानसभा क्षेत्र से अमरेंद्र प्रसाद का नाम भी सूची में शामिल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नोटिस पाने वालों में सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों के विधायक शामिल हैं, जिससे स्पष्ट है कि मामला दलगत राजनीति से अलग कानूनी दायरे में जांचा जा रहा है।


राजनीतिक और कानूनी असर

हाईकोर्ट की इस कार्रवाई को चुनावी पारदर्शिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित विधायकों की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

विधायकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया है। ऐसे में आगामी सुनवाई और अदालत के रुख पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा के भीतर और बाहर बयानबाजी भी तेज हो सकती है।