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मानेसर में पहली बार माको रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट: फोर्टिस मानेसर ने जटिल घुटना रोगों का किया सफल इलाज


मानेसर, 25 फरवरी 2026: घुटनों का पुराना दर्द केवल एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि यह व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। खासकर बुजुर्ग मरीजों के लिए यह समस्या समय के साथ गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में यदि सर्जरी को टाल दिया जाए, तो वर्षों तक सीमित मोबिलिटी और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है।

इसी चुनौती के समाधान के रूप में Fortis Hospital Manesar ने क्षेत्र में पहली बार वर्ल्ड-क्लास MAKO रोबोटिक-आर्म असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सुविधा शुरू की है। यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी से कहीं अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) उपचार प्रदान करती है।

🔬 क्या है MAKO रोबोटिक तकनीक?

MAKO सिस्टम एडवांस 3D CT-आधारित प्री-सर्जिकल प्लानिंग और रोबोटिक-आर्म असिस्टेंस पर आधारित है। इससे सर्जन मरीज की हड्डियों की संरचना के अनुसार सटीक प्लानिंग कर सकते हैं।

इसके प्रमुख लाभ:

  • इंप्लांट की सटीक फिटिंग
  • हेल्दी बोन और सॉफ्ट टिश्यू की सुरक्षा
  • कम दर्द और तेज रिकवरी
  • बेहतर मोबिलिटी और आत्मनिर्भरता

👩‍⚕️ सफल मामलों की झलक

✔ 68 वर्षीय आशा देशवाल

एडवांस ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित आशा देशवाल की बाइलेटरल रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई। सर्जरी के मात्र 6 घंटे बाद ही वे खड़ी होने और चलने में सक्षम हो गईं। आज वे बिना सहारे चलती हैं और आत्मविश्वास के साथ सीढ़ियां चढ़ती हैं।

✔ 69 वर्षीय नीलम भयाना

15 वर्षों से घुटनों के दर्द से जूझ रहीं नीलम भयाना अब सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जी रही हैं और पारिवारिक समारोहों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।

✔ 69 वर्षीय राधिया देवी

गंभीर दर्द से परेशान राधिया देवी सर्जरी के 24 घंटे के भीतर अपने पैरों पर खड़ी हो गईं और अब आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

✔ 74 वर्षीय प्रेम चंद पाहवा

गंभीर बो-लेग डिफॉर्मिटी से पीड़ित प्रेम चंद पाहवा अब MAKO रोबोटिक सर्जरी के बाद सीधे खड़े होकर चल पा रहे हैं। उनका दर्द कम हुआ है और आत्मविश्वास लौटा है।


🗣 विशेषज्ञ की राय

डॉ. रोहित लांबा, डायरेक्टर – ऑर्थोपिडिक्स, Fortis Healthcare से संबद्ध Fortis Hospital Manesar ने कहा कि भारत में ऑस्टियोपोरोसिस और बोन डिजेनरेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर महिलाओं में लो बोन मिनरल डेंसिटी आम होती जा रही है। ऐसे में रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट भविष्य की सुरक्षित और प्रभावी सर्जरी तकनीक साबित हो रही है।

वहीं, फैसिलिटी डायरेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, अब बुजुर्ग मरीजों को एडवांस जॉइंट केयर के लिए दिल्ली या अन्य मेट्रो शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वर्ल्ड-क्लास रोबोटिक ऑर्थोपिडिक इलाज अब मानेसर में ही उपलब्ध है।


मानेसर जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र में इस तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा का आना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करता है, बल्कि बुजुर्गों और ऑर्थोपिडिक मरीजों के लिए नई उम्मीद भी जगाता है।

MAKO रोबोटिक सर्जरी केवल एक तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि यह मरीजों को दर्द से मुक्ति, आत्मनिर्भरता और बेहतर जीवन गुणवत्ता की ओर लौटाने का एक सशक्त माध्यम बन रही है।

SATTE 2026 से पहले नई दिल्ली में Tourism Malaysia की प्रेस कॉन्फ्रेंस, भारत के साथ पर्यटन सहयोग को मिली नई गति

नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026। Tourism Malaysia ने SATTE 2026 में भागीदारी से पहले नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भारतीय आउटबाउंड पर्यटन बाजार के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया। इस संवाद का उद्देश्य भारत और मलेशिया के बीच पर्यटन सहयोग को और सुदृढ़ करना था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को टूरिज्म मलेशिया के चेयरमैन वाय.बी.एच.जी. दातुक मनोहरन पेरियासामी और भारत में मलेशिया के उच्चायुक्त दातो’ मुज़ाफ़र शाह मुस्तफ़ा ने संबोधित किया। कार्यक्रम में ट्रैवल ट्रेड पार्टनर्स, एयरलाइंस प्रतिनिधि, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारक और मीडिया के सदस्य मौजूद रहे।

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब मलेशिया अपने वैश्विक अभियान Visit Malaysia Year 2026 (VM2026) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय प्रचार-प्रसार को तेज कर रहा है।


मजबूत प्रदर्शन, भारत प्रमुख स्रोत बाजार

मलेशिया ने वर्ष 2025 में 4.22 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया, जो 2024 की तुलना में 14.6% अधिक है। भारत मलेशिया के लिए तेजी से उभरता और महत्वपूर्ण स्रोत बाजार बना हुआ है। वर्ष 2025 में 16 लाख से अधिक भारतीय पर्यटक मलेशिया पहुंचे, जो इस गंतव्य के प्रति बढ़ते विश्वास और आकर्षण को दर्शाता है।

चेयरमैन दातुक मनोहरन पेरियासामी ने कहा कि भारत मलेशिया की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के मजबूत द्विपक्षीय संबंध और मलेशिया की सुरक्षित, विविधतापूर्ण एवं उच्च-मूल्य गंतव्य की छवि भारतीय पर्यटकों की बढ़ती संख्या का आधार हैं।


भारतीय बाजार पर विशेष फोकस

भारत में मलेशिया के उच्चायुक्त दातो’ मुज़ाफ़र शाह मुस्तफ़ा ने बताया कि भारतीय बाजार ने अवकाश पर्यटन, MICE, डेस्टिनेशन वेडिंग और प्रीमियम ट्रैवल सेगमेंट में उत्साहजनक प्रदर्शन किया है। बेहतर हवाई संपर्क और भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा-फ्री सुविधा जारी रहने से 2026 में और अधिक वृद्धि की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि टियर-I, टियर-II और टियर-III शहरों में व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना प्राथमिकता है, ताकि गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ पर्यटन अनुभव प्रदान किए जा सकें।


बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगा सहयोग

भारत और मलेशिया के बीच प्रति सप्ताह 240 से अधिक उड़ानों का संचालन हो रहा है। वीज़ा-फ्री प्रवेश की सुविधा भी भारतीय यात्रियों के लिए यात्रा को और सुगम बना रही है। यह कनेक्टिविटी VM2026 अभियान के तहत पर्यटन वृद्धि को गति देने में सहायक मानी जा रही है।


24 फरवरी को आयोजित प्रमुख कार्यक्रम

SATTE 2026 से पहले नई दिल्ली में टूरिज्म मलेशिया ने तीन प्रमुख रणनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए—

  • वेडिंग सेमिनार: मलेशिया को भव्य भारतीय शादियों के लिए आदर्श डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें लग्ज़री वेन्यू और सांस्कृतिक अनुकूल सेवाओं पर जोर रहा।
  • MICE बी2बी सत्र: मलेशियाई पर्यटन उद्योग और भारतीय कॉर्पोरेट प्लानर्स के बीच सीधा संवाद स्थापित किया गया।
  • मलेशिया नेटवर्किंग डिनर 2026: ट्रैवल ट्रेड पार्टनर्स, एयरलाइंस, वेडिंग प्लानर्स और मीडिया के साथ सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विशेष आयोजन।

सतत पर्यटन विकास पर जोर

Malaysia Tourism Promotion Board, जो मलेशिया सरकार के पर्यटन, कला और संस्कृति मंत्रालय (MOTAC) के अंतर्गत कार्यरत है, देश को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए कार्य कर रहा है।

VM2026 अभियान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (UNSDGs) के अनुरूप टिकाऊ और समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य मलेशिया की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।


यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत और मलेशिया के बीच पर्यटन साझेदारी को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ VM2026 के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एसडीआईईटी में 26–28 फरवरी को होगा “वेत्रत्व 2K26” का भव्य आयोजन, खेल-सांस्कृतिक व तकनीकी उत्सव एक साथ

(एसडीआईईटी) में 26 से 28 फरवरी 2026 तक बहुप्रतीक्षित वार्षिक महोत्सव “वेत्रत्व 2K26” का आयोजन किया जाएगा। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम संस्थान परिसर में आयोजित होगा, जिसमें खेल, संस्कृति और तकनीकी नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

तीन दिन, अनेक आयाम

“वेत्रत्व 2K26” के अंतर्गत वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, सांस्कृतिक उत्सव और तकनीकी फेस्ट का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों से आगे बढ़कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना है।

संस्थान का मानना है कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच और नवाचार की भावना को सशक्त बनाते हैं।

खेल, संस्कृति और तकनीक का संगम

खेलकूद प्रतियोगिता में विभिन्न इनडोर और आउटडोर खेलों का आयोजन होगा, जिससे छात्रों में खेल भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक उत्सव के दौरान नृत्य, संगीत और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां परिसर को रंगों और उत्साह से भर देंगी।

वहीं तकनीकी उत्सव में अलग-अलग तकनीकी प्रतियोगिताएं और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जो विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को निखारने का अवसर देंगी।

प्राचार्य का संदेश

संस्थान के प्राचार्य डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने कहा,
“वेत्रत्व 2K26 हमारे संस्थान की समग्र शिक्षा की सोच को प्रतिबिंबित करता है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ ऐसे मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें। मैं सभी प्रतिभागियों और आयोजन समिति को इस महोत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

उत्सव का आमंत्रण

संस्थान को उम्मीद है कि विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग लेंगे, जिससे परिसर में सीख, नवाचार और उत्सव का सकारात्मक वातावरण बनेगा।

एसडीआईईटी ने सभी विद्यार्थियों और हितधारकों से “वेत्रत्व 2K26” में सहभागिता कर इसे यादगार बनाने की अपील की है।

हल्की बारिश से सुधरी दिल्ली-एनसीआर की हवा, GRAP-2 के प्रतिबंध हटाए गए
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दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बुधवार को हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। बेहतर मौसम परिस्थितियों और घटते प्रदूषण स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू स्टेज-2 एंटी-पॉल्यूशन प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के बिगड़ते स्तर को देखते हुए 19 अक्टूबर 2025 को GRAP स्टेज-II लागू किया गया था, जिसे अब 18 फरवरी 2026 को हटा लिया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार राजधानी का दिन का औसत AQI 214 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में होने के बावजूद सुधार की स्पष्ट प्रवृत्ति दर्शाता है।

सुबह कई इलाकों में हुई बूंदाबांदी

पिछले कुछ दिनों से बढ़ते तापमान के बीच बुधवार सुबह अक्षरधाम, मोती बाग, कर्तव्य पथ, सफदरजंग और पालम समेत राजधानी के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी हुई। आसमान में बादल छाए रहे। एनसीआर के अन्य शहरों में भी इसी तरह का मौसम दर्ज किया गया। मौसम में बदलाव के बावजूद न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मंगलवार की तुलना में 5.7 डिग्री अधिक है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजधानी के मौसम में बदलाव आया है, जिसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया। विभाग ने बताया कि सुबह से कई स्थानों पर हल्की वर्षा हुई, जबकि दोपहर में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग का अनुमान है कि इस हल्की बारिश से तापमान में लंबे समय तक या बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। बुधवार की वर्षा से भले ही प्रदूषण और गर्मी से अस्थायी राहत मिली हो, लेकिन आने वाले दिनों में तापमान फिर सामान्य से अधिक बना रह सकता है।

भारत वापसी पर अनिश्चितता: विजय माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जताई कानूनी मजबूरी

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह फिलहाल यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह कब भारत लौट पाएंगे। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में चल रही कानूनी कार्रवाइयों से उत्पन्न बाधाओं का हवाला दिया।

अपने वकील के माध्यम से उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि यूनाइटेड किंगडम की अदालतों द्वारा जारी आदेश उन्हें इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने, विदेश यात्रा की कोशिश करने, अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज़ के लिए आवेदन करने या उसे रखने से भी रोकते हैं। इन प्रतिबंधों के कारण वह भारत वापसी की कोई निश्चित समयसीमा बताने में असमर्थ हैं।

माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने अदालत से आग्रह किया कि उनकी दोनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई की जाए, भले ही उनका मुवक्किल शारीरिक रूप से भारत में उपस्थित न हो सके। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कई मामलों में याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति के बावजूद संवैधानिक अदालतों ने रिट याचिकाओं पर निर्णय दिए हैं।

यह घटनाक्रम अदालत के उस सख्त रुख के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों को चुनौती देने वाली माल्या की अर्जी पर तब तक सुनवाई नहीं करेगा, जब तक वह स्वयं वापस आकर उसके अधिकार क्षेत्र में उपस्थित नहीं होते। अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि यदि वह राहत चाहते हैं तो क्या उनकी भारत लौटने की मंशा है।

माल्या के वकील ने दलील दी कि इंग्लैंड की अदालतों के आदेश उनके देश छोड़ने की क्षमता पर रोक लगाते हैं, जिसके चलते वह भारत यात्रा की कोई समयसीमा तय नहीं कर पा रहे।

हालांकि, पीठ ने इस रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल इंग्लैंड की अदालतों के आदेशों का हवाला देना पर्याप्त नहीं है, जब तक यह स्पष्ट न हो कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या यात्रा की अनुमति मांगी गई है।

पीठ ने देसाई को निर्देश दिया कि एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए, जिसमें यूके की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की प्रकृति, उन्हें चुनौती देने की स्थिति और भारत वापसी पर माल्या का स्पष्ट रुख दर्ज हो। अदालत ने हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।

अदालत ने दोहराया कि भगोड़ा घोषित कोई भी व्यक्ति भारतीय कानून के दायरे से बाहर रहकर अदालत से राहत की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए माल्या न्यायिक प्रक्रिया से बच नहीं सकते।

इसी के मद्देनज़र, पीठ ने 2018 के कानून के खिलाफ उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए उनकी शारीरिक वापसी या कम से कम ऐसा करने के स्पष्ट आश्वासन को अनिवार्य शर्त माना है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर मौजूदा याचिका में फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।

अप्रैल से दिल्ली से जयपुर का सफर 4 घंटे में: NH-48 पर 6 नए फ्लाईओवर से बढ़ेगी रफ्तार
दिल्ली से जयपुर अब 4 घंटे में पूरा होगा सफर। (फाइल)
दिल्ली से जयपुर अब 4 घंटे में पूरा होगा सफर। (फाइल)

नई दिल्ली। अप्रैल से दिल्ली से जयपुर का सफर और भी तेज व सुगम होने जा रहा है। दिल्ली से जयपुर तक NH-48 के रास्ते यात्रा अब बिना रुकावट के पूरी की जा सकेगी। इसके लिए कई नए पुल और फ्लाईओवर तैयार किए जा रहे हैं, जिससे मार्ग अधिक स्मूथ, तेज और जाम-मुक्त होगा।

नए स्ट्रक्चर चालू होने के बाद दिल्ली से जयपुर पहुंचने में लगभग 4 से 4.5 घंटे का समय लगेगा। पहले जहां रास्ते में बार-बार रुकावटें आती थीं, वहीं अब पुराना हाईवे रूट बांदीकुई लिंक रोड के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के समान कनेक्टिविटी देने लगेगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का लक्ष्य 31 मार्च तक निर्माणाधीन छह पुलों और फ्लाईओवर को शुरू करने का है। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से लंबे समय से बनी ट्रैफिक बाधाएं खत्म होंगी, कैरिजवे की निरंतरता बेहतर होगी और गुड़गांव-कोटपुतली-जयपुर कॉरिडोर पर यातायात और अधिक सुरक्षित बनेगा।

पीक आवर ट्रैफिक से मिलेगी राहत

ट्रैफिक सिग्नल और एट-ग्रेड क्रॉसिंग की जगह ग्रेड सेपरेटर बनने से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों और लंबी दूरी के ड्राइवरों को बड़ी राहत मिलेगी। खासतौर पर दिल्ली बॉर्डर के आसपास पीक आवर में जाम कम होगा, सुरक्षित मर्जिंग संभव होगी और वाहनों की रफ्तार एक समान बनी रहेगी।

कोटपुतली, बहरोड़ और दहमी में फ्लाईओवर पहले ही तैयार हो चुके हैं, जबकि खातोलाई में एक पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया है। इनका उद्देश्य व्यस्त जंक्शनों पर भीड़ कम करना और पहले से दुर्घटना-प्रवण व सिग्नल-भारी चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना है।

शाहपुरा और बावल में अंतिम चरण का काम

शाहपुरा और बावल में दो अन्य फ्लाईओवरों का निर्माण जारी है। इसके साथ सोतानाला, नीलका और नीझर में बन रहे पुल भी अंतिम चरण में हैं। इनके शुरू होने के बाद ब्लैक स्पॉट खत्म होने और स्थानीय चौराहों पर लगने वाले स्टॉपेज टाइम में भारी कमी आने की उम्मीद है।

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर का आरोप, प्रिंसिपल पर उत्पीड़न का मामला
गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज। (सोशल मीडिया)

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) की एक महिला डॉक्टर ने मंगलवार को संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. अच्युत बैश्य द्वारा कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच शुरू की गई है।

एसोसिएट प्रोफेसर और क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष ने इससे पहले छह फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत शिकायत सौंपी थी, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अनुचित व्यवहार, धमकी और प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

शिकायत के अनुसार, स्वतंत्र विभाग की स्थापना के बाद डॉक्टर को शुरू में प्रशासन से सराहना मिली, लेकिन बाद में संबंध बिगड़ गए। गुवाहाटी के पानबाजार महिला पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी एफआइआर में डॉक्टर ने दावा किया कि डॉ. बैश्य ने बार-बार उनसे अकेले अपने कार्यालय में मिलने पर जोर दिया, जबकि अस्पताल परिसर के भीतर नियमित आधिकारिक बातचीत संभव थी। ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे उन्हें असहज महसूस हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. बैश्य ने उनसे कहा कि जब वह पूरी तरह से खाली और अकेली हों तब उन्हें फोन करें और सुझाव दिया कि उनसे मिलने के लिए दरवाजा हमेशा खुला है।