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अप्रैल से दिल्ली से जयपुर का सफर 4 घंटे में: NH-48 पर 6 नए फ्लाईओवर से बढ़ेगी रफ्तार
दिल्ली से जयपुर अब 4 घंटे में पूरा होगा सफर। (फाइल)
दिल्ली से जयपुर अब 4 घंटे में पूरा होगा सफर। (फाइल)

नई दिल्ली। अप्रैल से दिल्ली से जयपुर का सफर और भी तेज व सुगम होने जा रहा है। दिल्ली से जयपुर तक NH-48 के रास्ते यात्रा अब बिना रुकावट के पूरी की जा सकेगी। इसके लिए कई नए पुल और फ्लाईओवर तैयार किए जा रहे हैं, जिससे मार्ग अधिक स्मूथ, तेज और जाम-मुक्त होगा।

नए स्ट्रक्चर चालू होने के बाद दिल्ली से जयपुर पहुंचने में लगभग 4 से 4.5 घंटे का समय लगेगा। पहले जहां रास्ते में बार-बार रुकावटें आती थीं, वहीं अब पुराना हाईवे रूट बांदीकुई लिंक रोड के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के समान कनेक्टिविटी देने लगेगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का लक्ष्य 31 मार्च तक निर्माणाधीन छह पुलों और फ्लाईओवर को शुरू करने का है। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से लंबे समय से बनी ट्रैफिक बाधाएं खत्म होंगी, कैरिजवे की निरंतरता बेहतर होगी और गुड़गांव-कोटपुतली-जयपुर कॉरिडोर पर यातायात और अधिक सुरक्षित बनेगा।

पीक आवर ट्रैफिक से मिलेगी राहत

ट्रैफिक सिग्नल और एट-ग्रेड क्रॉसिंग की जगह ग्रेड सेपरेटर बनने से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों और लंबी दूरी के ड्राइवरों को बड़ी राहत मिलेगी। खासतौर पर दिल्ली बॉर्डर के आसपास पीक आवर में जाम कम होगा, सुरक्षित मर्जिंग संभव होगी और वाहनों की रफ्तार एक समान बनी रहेगी।

कोटपुतली, बहरोड़ और दहमी में फ्लाईओवर पहले ही तैयार हो चुके हैं, जबकि खातोलाई में एक पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया है। इनका उद्देश्य व्यस्त जंक्शनों पर भीड़ कम करना और पहले से दुर्घटना-प्रवण व सिग्नल-भारी चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना है।

शाहपुरा और बावल में अंतिम चरण का काम

शाहपुरा और बावल में दो अन्य फ्लाईओवरों का निर्माण जारी है। इसके साथ सोतानाला, नीलका और नीझर में बन रहे पुल भी अंतिम चरण में हैं। इनके शुरू होने के बाद ब्लैक स्पॉट खत्म होने और स्थानीय चौराहों पर लगने वाले स्टॉपेज टाइम में भारी कमी आने की उम्मीद है।

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर का आरोप, प्रिंसिपल पर उत्पीड़न का मामला
गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज। (सोशल मीडिया)

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) की एक महिला डॉक्टर ने मंगलवार को संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. अच्युत बैश्य द्वारा कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच शुरू की गई है।

एसोसिएट प्रोफेसर और क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष ने इससे पहले छह फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत शिकायत सौंपी थी, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अनुचित व्यवहार, धमकी और प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

शिकायत के अनुसार, स्वतंत्र विभाग की स्थापना के बाद डॉक्टर को शुरू में प्रशासन से सराहना मिली, लेकिन बाद में संबंध बिगड़ गए। गुवाहाटी के पानबाजार महिला पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी एफआइआर में डॉक्टर ने दावा किया कि डॉ. बैश्य ने बार-बार उनसे अकेले अपने कार्यालय में मिलने पर जोर दिया, जबकि अस्पताल परिसर के भीतर नियमित आधिकारिक बातचीत संभव थी। ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे उन्हें असहज महसूस हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. बैश्य ने उनसे कहा कि जब वह पूरी तरह से खाली और अकेली हों तब उन्हें फोन करें और सुझाव दिया कि उनसे मिलने के लिए दरवाजा हमेशा खुला है।