अजमतगढ़ नगर पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, लोकायुक्त से जांच की मांग
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की अजमतगढ़ नगर पंचायत एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। नगर पंचायत के अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी (EO) और अन्य कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में अभिषेक कुमार रॉय द्वारा लोकायुक्त को विस्तृत शिकायत दी गई है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
शिकायत का विवरण
शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार रॉय, जो कि आजमगढ़ के निवासी हैं, ने उत्तर प्रदेश लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 के तहत यह परिवाद दाखिल किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत अजमतगढ़ में लंबे समय से नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है।
नियमित बैठकों का न होना
शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका अधिनियम के अनुसार हर महीने बोर्ड बैठक आयोजित करना अनिवार्य है। लेकिन अजमतगढ़ नगर पंचायत में कई महीनों से कोई बैठक नहीं बुलाई गई। इससे पारदर्शिता और जनहित प्रभावित हुआ है और बोर्ड सदस्यों की भूमिका सीमित हो गई है।
सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग
एक गंभीर आरोप यह भी है कि नगर पंचायत के अधिकारी सरकारी तेल का उपयोग निजी वाहनों में कर रहे हैं। कागजों में यह तेल सफाई मशीनों और वाहनों के नाम पर दिखाया जाता है, जबकि वास्तव में इसका उपयोग व्यक्तिगत कामों में किया जा रहा है।
एमआरएफ सेंटर बना शोपीस
नगर पंचायत द्वारा करीब 33.67 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया एमआरएफ (Material Recovery Facility) सेंटर और उसमें लगाई गई लाखों की मशीनें बंद पड़ी हैं। शिकायत के अनुसार यह सेंटर सिर्फ कागजों तक सीमित है और कचरे का निस्तारण खुले में किया जा रहा है, जिससे गंदगी फैल रही है।
सरकारी सामान की हेराफेरी
शिकायत में आरोप है कि वर्षों से रखी गई सरकारी सामग्री जैसे सोलर पैनल, बैटरी, LED लाइट, फर्नीचर आदि को बिना उचित प्रक्रिया के बेच दिया गया। इससे सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और धन उगाही की आशंका जताई गई है।
फर्जी भर्ती और वेतन घोटाला
नगर पंचायत में आउटसोर्सिंग के नाम पर फर्जी कर्मचारियों को जोड़कर वेतन निकाले जाने का भी आरोप है। शिकायत में बताया गया कि करीब 20 से ज्यादा फर्जी नामों पर वेतन निकाला गया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों से जबरन वेतन का हिस्सा वापस लेने का भी आरोप लगाया गया है।
एक खास मामला “लकी” नामक छात्र का भी सामने आया है, जो स्कूल में पढ़ाई करता रहा, लेकिन नगर पंचायत में उसकी फर्जी उपस्थिति दिखाकर वेतन निकाला गया।
सरकारी वाहनों की बदहाली
नगर पंचायत द्वारा खरीदे गए मोबाइल टॉयलेट, टैंकर और अन्य वाहन खराब हालत में पड़े हैं। इनका कोई रखरखाव नहीं किया गया, जिससे करोड़ों की सरकारी संपत्ति बर्बाद हो रही है।
राजस्व में अनियमितता
टैंकर शुल्क, जेसीबी शुल्क और अन्य सेवाओं से प्राप्त धनराशि को नगर निधि में जमा न कर निजी स्तर पर वसूली करने का आरोप भी लगाया गया है। इससे नगर पंचायत को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
पोखरियों की नीलामी में गड़बड़ी
शिकायत में कहा गया है कि पोखरियों की नीलामी नियमों के अनुसार नहीं की गई। निर्धारित 50% राशि जमा कराए बिना ही नीलामी अधिकार दे दिए गए, जिससे राजस्व हानि और पक्षपात की आशंका बढ़ गई है।
निजी लाभ के लिए सरकारी धन का उपयोग
अधिशासी अधिकारी पर अपने निजी ड्राइवर का वेतन नगर पंचायत से दिलाने का आरोप है। यह नियुक्ति किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत नहीं की गई, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया।
सामुदायिक संपत्तियों की उपेक्षा
सीमा विस्तार के बाद नगर पंचायत के अधीन आए सामुदायिक शौचालय को भी लावारिस हालत में छोड़ दिया गया है। यह जनहित के प्रति लापरवाही का उदाहरण माना जा रहा है।
बीमा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी
नगर पंचायत के कई वाहन बिना बीमा के संचालित किए जा रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। किसी दुर्घटना की स्थिति में इससे बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
लोकायुक्त से कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि नगर पंचायत में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
अजमतगढ़ नगर पंचायत पर लगे ये आरोप न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला पूरे प्रदेश में स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर सकता है। अब देखना होगा कि लोकायुक्त इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
