सतयुग दर्शन वसुंधरा परिसर में 15 अगस्त को “सतयुग परिवार–स्नेह मिलन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सतयुग दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SDIET) एवं सतयुग दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च (SDIER) के शिक्षक एवं स्टाफ सदस्यों के परिवारजनों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सह परिवार स्नेह एवं आत्मिक जागृति के भाव के साथ आत्मिक ज्ञान, आत्मबोध एवं सार्थक जीवन की दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक एवं मुख्य अतिथि श्री सजन जी, सतयुग दर्शन ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती रेशमा गांधी जी, सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की चेयरपर्सन श्रीमती अनुपमा तलवार जी तथा SDIET के चेयरमैन डॉ. वीरेश दत्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर श्री सजन जी ने अपने आशीर्वचन में मानव जीवन में आत्मिक ज्ञान एवं आत्मबोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भौतिक ज्ञान एवं उपलब्धियों से आगे बढ़कर जीवन के यथार्थ मकसद को समझने और सार्थक जीवन की दिशा में अग्रसर होने का संदेश दिया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बताया गया कि आत्म ज्ञान ही आत्म बोध का आधार है, जो मनुष्य को जगत की चकाचौंध से हटाकर पुनः आत्मस्थिति अर्थात अपने यथार्थ स्वरूप के संग जोड़ने में सक्षम बनाता है। आत्मज्ञान से मन, मस्तिष्क एवं घर-परिवार में स्थाई शांति, एकता एवं समरूपता को साधे रखने तथा जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में अपनी मानसिक स्थिति को आत्म नियंत्रण द्वारा समरसता में रखने की क्षमता विकसित होती है। इसी आत्मिक जागृति के माध्यम से सत्य-धर्म अनुकूल भाव-स्वभाव, सजन भाव एवं समभाव-समदृष्टि को अपनाते हुए निष्कामता पूर्वक जीवन जीने और जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत के साथ हुआ, जिसके पश्चात सतयुग दर्शन ट्रस्ट का परिचय एवं वीडियो प्रस्तुति, संबोधन तथा संवादात्मक ऐप-आधारित गतिविधि आयोजित की गई। सतयुग दर्शन ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री नितिन मिनोचा जी ने समाज के भौतिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए ट्रस्ट द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियों एवं प्रयासों से उपस्थित जनों को परिचित कराया। सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के प्राचार्य श्री दीपेंद्र कांत जी के मार्गदर्शन एवं सौजन्य से SDIET के विद्यार्थियों द्वारा आत्मज्ञान के महत्व पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम के मुख्य संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। SDIER की प्राचार्या डॉ. जुगनू खट्टर भाटिया ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन SDIET के प्राचार्य डॉ. शैलेन्द्र त्यागी द्वारा प्रस्तुत आभार ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के दौरान दस वर्षों से अधिक समय से संस्थान से जुड़े फैकल्टी सदस्यों—श्रीमती विनीता चौधरी, श्रीमती स्नेहा शर्मा, श्री रवि बख्शी एवं श्री परमजीत सिंह ने भी संस्थान के साथ अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने बताया कि वे अपने घर परिवार से सतयुग दर्शन परिवार में आए और संस्थान से जुड़ने के बाद उन्हें यहां भी वही अपनत्व एवं पारिवारिक भाव अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि संस्थान की मूल्यपरक विचारधारा एवं संस्कारों ने उनके व्यक्तिगत जीवन में भी सकारात्मक सहयोग दिया है तथा जीवन में विभिन्न परिस्थितियों एवं समस्याओं के दौरान उन्हें संस्थान की ओर से निरंतर सहयोग एवं संबल प्राप्त हुआ। उनके लिए संस्थान केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार से भी अग्रणी है, जहां उन्हें आत्मीयता, सहयोग और अपनत्व का अनुभव होता है।
कार्यक्रम में सहभागी परिवारों ने आयोजन के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन में आत्मज्ञान की आवश्यकता का अनुभव हुआ। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए विशेष रूप से आत्मज्ञान एवं सार्थक जीवन के संदेश को सहज, सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किए जाने की प्रशंसा की।
कार्यक्रम के पश्चात सह परिवार भोजन एवं ध्यान कक्ष भ्रमण किया गया। उपस्थित जनों को सतयुग दर्शन वसुंधरा स्थित विश्व के पहले समभाव-समदृष्टि के निःशुल्क स्कूल ‘ध्यान कक्ष’ की गतिविधियों से परिचित कराया गया। ध्यान कक्ष में आत्मिक ज्ञान, आत्मबोध तथा समभाव-समदृष्टि अनुकूल जीवन की दिशा में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से हर आयु वर्ग के लोगों को जोड़ा जाता है। इन गतिविधियों से ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जुड़कर आत्मिक ज्ञान प्राप्त करने तथा यथार्थता पूर्ण मंगलकारी एवं सार्थक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। सबकी जानकारी हेतु इस समभाव समदृष्टि के निःशुल्क स्कूल से जुड़ने हेतु , 9899891624, 9871405300 पर सम्पर्क करें व ट्रस्ट की अन्य गतिविधियों से जुड़ने हेतु SATYUG DARSHAN TRUST एप (जो प्लेस्टोर एवं एप्प स्टोर पर उपलब्ध है) डाउनलोड कर लाभांवित हो सकते हैं।