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ओमान के पास बड़ा तनाव: Iran ने केमिकल टैंकर पर चलाई गोलियां, 12 भारतीय बाल-बाल बचे

HighLights

  • ईरान ने समुद्र में रोका टैंकर, चलाई गोलियां
  • 12 भारतीय क्रू सुरक्षित, बड़ा खतरा टला
  • ओमान के पास हुई घटना
  • होर्मुज में बढ़ती जा रही तनातनी

नई दिल्ली: समुद्र में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने टोगो के झंडे वाले एक केमिकल टैंकर को निशाना बनाते हुए फायरिंग की। इस जहाज पर 12 भारतीय मौजूद थे, जो इस घटना में सुरक्षित बच गए।

अचानक रोका जहाज

जानकारी के मुताबिक, यह घटना ओमान के शिनास क्षेत्र के पास हुई, जहां ईरानी कोस्ट गार्ड ने टैंकर को रोक लिया। चेतावनी के रूप में गोलियां चलाई गईं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

भारतीय क्रू सुरक्षित

सरकार की ओर से पुष्टि की गई है कि जहाज पर सवार सभी 12 भारतीय सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

MT Chiron पर हमला

इस जहाज की पहचान MT Chiron के रूप में हुई है, जो टोगो के झंडे के तहत संचालित हो रहा था।

होर्मुज बना हॉटस्पॉट

फारसी खाड़ी और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में हाल के दिनों में तनाव तेजी से बढ़ा है। ईरान की सख्ती के चलते कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

‘AAP अब बदल गई है’ – Raghav Chadha का बड़ा खुलासा, 7 सांसदों के साथ BJP जॉइन करने की बताई असली वजह

HighLights

  • राघव चड्ढा बोले – AAP में काम करना मुश्किल हो गया था
  • ‘टॉक्सिक माहौल’ और दबाव की बात कही
  • 7 सांसदों ने मिलकर लिया पार्टी छोड़ने का फैसला
  • BJP में शामिल होकर नई शुरुआत

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद राघव चड्ढा ने पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि पार्टी अब उस सोच और मूल्यों से दूर हो चुकी है, जिनके साथ इसकी शुरुआत हुई थी।

उन्होंने बताया कि वह राजनीति में करियर बनाने नहीं बल्कि बदलाव लाने के मकसद से आए थे। लेकिन समय के साथ पार्टी के भीतर का माहौल बदल गया और काम करने की स्वतंत्रता खत्म होती गई।

‘आवाज दबाई जाती थी’

चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर नेताओं की आवाज को दबाया जाता था और स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं दी जाती थी। उन्होंने इसे एक ‘टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट’ बताया।

‘गलत दिशा में जा रही थी पार्टी’

उनका कहना है कि पार्टी कुछ लोगों के नियंत्रण में आ गई है, जो निजी फायदे को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे माहौल में काम करना उनके लिए मुश्किल हो गया था।

क्यों छोड़ी पार्टी?

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्थिति सुधारने की कोशिश के बाद भी जब बदलाव नहीं आया, तो उन्होंने अलग होने का फैसला किया। उनके अनुसार, एक साथ कई सांसदों का पार्टी छोड़ना इस बात का संकेत है कि समस्या गंभीर थी।

BJP में नई शुरुआत

राघव चड्ढा ने हाल ही में अन्य सांसदों के साथ BJP का दामन थामा है। इसे देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

जनता से किया वादा

उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे और बेहतर समाधान देने की दिशा में काम करेंगे।

लद्दाख मुद्दे पर केंद्र की पहल तेज, 22 मई को अहम बैठक; समाधान की दिशा में बढ़े कदम

जम्मू/नई दिल्ली: लद्दाख से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने 22 मई को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा की जाएगी।

इस प्रस्तावित बैठक में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा संबंधित पक्षों को भी आमंत्रित किया जा सकता है ताकि व्यापक स्तर पर संवाद स्थापित किया जा सके।

बताया जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लद्दाख के विभिन्न सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। सरकार की ओर से यह कोशिश की जा रही है कि सभी पक्षों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से बातचीत कर कोई स्थायी समाधान निकाला जाए।

गौरतलब है कि इस वर्ष फरवरी में भी केंद्र और लद्दाख के संगठनों के बीच वार्ता शुरू हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी थी। इसके बाद से बातचीत की प्रक्रिया ठप पड़ी हुई थी, जिससे क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है।

लद्दाख के संगठनों की प्रमुख मांगों में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है। संगठनों का कहना है कि अब इन मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस चर्चा होनी चाहिए।

इससे पहले भी क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनावपूर्ण स्थिति देखी गई थी, जिसने बातचीत की प्रक्रिया को प्रभावित किया। ऐसे में यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

हालांकि, लेह एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उन्हें बैठक की जानकारी सार्वजनिक माध्यमों से मिली है, लेकिन अभी तक उन्हें औपचारिक निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में शामिल होने को लेकर अंतिम निर्णय संयुक्त चर्चा के बाद लिया जाएगा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 22 मई को होने वाली इस बैठक से लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को कितना बल मिलता है और क्या इससे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं।